परलीका रा आशु कवि छोगसिंह री वाणी में राजस्थान महिमा सुणो सा....

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1 टिप्पणी:

  1. रिकॉर्डिंग मंद भी है , अर साफ़ भी कम है ।
    …अर किणी कवि नैं इत्ती सी देर सुणियां तिरस कोनी बुझै ।
    आप आंरी तेज़ आवाज़ मांय सागीड़ी कवितावां सुणवावो सा ।
    हां , बानगी दाय ज़रूर आयी ।
    छोगसिंहजी नैं रंग !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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